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वक्फ संशोधन विधेयक: अमित शाह “4 साल में मुस्लिम समझ जाएंगे बिल के फायदे, अब मिलीभगत नहीं चलेगी”, अमित शाह ने क्यों कहा कि विपक्ष देश तोड़ देगा, वक्फ और वक्फ बोर्ड में क्या अंतर है? जाने

संसद में बुधवार को वक्फ संशोधन अधिनियम पेश कर दिया गया है। बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने इसका जमकर विरोध किया है। वहीं, सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष की सभी आपत्तियों का जवाब दिया और उनपर तुष्टिकरण का आरोप लगाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी वक्फ बिल को लेकर सदन को संबोधित किया है। अमित शाह ने सदन को वक्फ और वक्फ बोर्ड में अंतर भी बताया और विपक्षी दलों पर देश को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

लोकसभा में अमित शाह वक्फ संशोधन विधेयक पर बोल रहे हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा, वक्फ में पहले तो कोई गैर इस्लामिक सदस्य आएगा ही नहीं। ना मुतवल्लिक गैर इस्लामिक होगा और ना ही कोई दूसरा गैर इस्लामी होगा। अमित शाह ने इसपर आगे कहा कि वक्फ धार्मिक हुआ, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद धार्मिक नहीं है। विरोधी दलों द्वारा वोटबैंक के लिए मुसलमानों को भड़काया जा रहा है। आप लोग (विपक्षी दल) देश को तोड़ दोगे। मैं मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि आपके वक्फ में कोई भी गैर मुसलमान नहीं आएगा। लेकिन जो वक्फ बोर्ड है और वक्फ परिषद है, उसे लेकर हम प्रावधान लेकर आए हैं, ताकि वक्फ के नाम पर औने-पौने दाम में संपत्तियों को 100-100 साल के लिए किराए पर देने वालों को पकड़ना और उन्हें निकालना इस बिल का उद्देश्य है। वक्फ का पैसा जो चोरी होता है ना उसे पकड़ने का काम वक्फ परिषद करेगा। ये चाहते हैं कि इनके राज में जो मिलीभगत चल रही थी, वो चलती रहे। लेकिन ये नहीं चलने देंगे हम।

कांग्रेस ने रातों-रात बदला वक्फ का नियम

अमित शाह ने कहा कि 2013 में वक्फ का जो संशोधन आया। अगर वो नहीं किया गया होता तो ये बिल लाने की जरूरत नहीं पड़ती। 2014 में चुनाव आने वाला था और 2013 में रातों रात वक्फ कानून को एक्स्ट्रीम बनाया गया। इसके कारण हुआ ये कि दिल्ली लुटियन की 123 वीवीआई संपत्ति कांग्रेस सरकार ने जब चुनाव मुहाने पर थे, 25 दिन दूर था तो वक्फ को देने का काम किया। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उत्तरी रेलवे की भूमि वक्फ के नाम घोषित कर दी। 250 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले 12 गावों पर वक्फ का स्वामित्व हो गया। तमिलनाडु के 1500 पुरानी तिरुचेंदुरई मंदिर की 400 एकड़ संपत्ति को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दी गई। कर्नाटक मणिपट्टी समिति की रिपोर्ट कहती है कि 29 हजार एकड़ भूमि वक्फ भी, बिजनेस के उपयोग के लिए किराए पर दे दी गई।

मुसलमानों के फायदे का है बिल

अमित शाह ने आगे कहा कि बेंगलुरू में 602 एकड़ भूमि को जब्त करने से रोकने के लिए न्यायालय को बीच में पड़ना पड़ा। इसके अलावा 500 करोड़ रुपये जिस भूमि की कीमत है, वहां 5 स्टार होटल को महीने का 12 हजार रुपये लेकर किराए पर जमीन दे दी गई है। ये जमीन चोरी के लिए नहीं है। इसे हम रोकेंगे और जो इसके ठेकेदार बैठे हैं, उनको लगता है कि इससे वो जीत जाएंगे। आज देश के कई चर्च और चर्च के समूह वक्फ बिल का समर्थन कर रहे हैं। उनको लगता है कि इसका विरोध करके हम मुस्लिम भाईयों का सिंपथी जीतकर अपना वोटबैंक पक्का करेंगे। क्योंकि 4 साल में मुस्लिम भाईयों को मालूम पड़ जाएगा कि ये कानून उनके ही फायदे का है। ये वही लोग हैं जो अपने-अपने लोकसभा क्षेत्र में चर्चों को नाराज कर रहे हैं।

लालू यादव के बयान को अमित शाह ने किया याद

अमित शाह ने कहा कि वक्फ जो कि मुस्लिम भाईयों की धार्मिक क्रियाकलाप है, उसमें सरकार कोई दखल नहीं करना चाहती है। मुतवल्ली, वाकिफ सब उनका होगा। लेकिन वक्फ की संपत्ति इसका रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं, ये देखना इस बिल का काम होगा। इतनी भूमि वक्फ के पास है लेकिन इसका रेवेन्यू है मात्र 126 करोड़। लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि सारी जमीनें वक्फ को गईं, चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी, पटना में ही डाक बंगले की जितनी प्रॉपर्टी थी, सबपर अपार्टमेंट बन गए। इस तरह से काफी लूट खसोट किया गया है। लेकिन मैं चाहता हूं कि भविष्य में आप कड़ा कानून लाइए और चोरी करने वाले लोगों को सजा दी जाए।

अपनी संपत्ति को वक्फ कर सकते हैं, दूसरों के संपत्ति को नहीं

अमित शाह ने कहा कि वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद का कोई ऑर्डर, हम ऐसा नहीं कर रहे हैं कि कोर्ट नहीं जा सकते हैं। आपने तो कर दिया था कि इसे कोई कोर्ट में चैलेंज ही नहीं कर सकता है। इस देश में संविधान का राज है। 2013 में जिसकी भूमि हड़पी उसके मालिकों को भी कोर्ट से बाहर निकालने का पाप कांग्रेस ने किया है। अगर किसी मंदिर के लिए जमीन खरीदनी है तो जमीन की मालिकी किसकी ये देश में कौन तय करेगा। तो अगर वक्फ की भूमि जो वक्फ कर रहा है, उसकी जमीन वह है या नहीं, इसकी जांच अगर कलेक्टर करे तो इसमें क्या बुराई है। दान अपनी संपत्ति का किया जा सकता है दूसरी की संपत्ति का नहीं। कोई अमेरिका घूमने गया है, कोई कारोबार करने के लिए दिल्ली गया है। पता चला वह गांव वापस आया तो उसकी जमीन को वक्फ की संपत्ति घोषित कर दी गई।

अमित शाह बोले- हम तुष्टिकरण के लिए कानून नहीं लाते

अमित शाह ने कहा कि सैकड़ों साल की प्रैक्टिस, मुगलों के समय के प्रैक्टिस आज घोषित की जा सकती है। अब अगर आपको वक्फ घोषित करना है तो उसे आप ऐसे ही घोषित नहीं कर सकते हैं। वोट बैंक के लिए हम कोई कानून नहीं लाएंगे। कानून लोगों के न्याय और कल्याण के लिए होता है। कांग्रेस वाले कह रहे हैं क्या कानून ला रहे हैं। इसी सदन में नरेंद्र मोदी सरकार महिलाओं के आरक्षण का कानून लेकर आई। इसी सरकार में पिछड़ों को संवैधानिक अधिकार दिया गया। इसी सरकार में बजट में गरीबों को शौचालय, पानी, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो अनाज, बिजली और घर दिए गए। सबसे पहला कनवर्जन कानून ओडिशा और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार लेकर आई। उस समय कांग्रेस सरकार तुष्टिकरण की राजनीति पर नहीं चलती थी, महात्मा गांधी के विजन पर चलती थी।

अमित शाह बोले- हमने इसपर 16 घंटे से ज्यादा चर्चा की

अमित शाह ने कहा कि लोभ, लालच, भय के जरिए किसी का धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता है। कोई गरीब है, कम पढ़ा लिखा है तो क्या उसका धर्म परिवर्तन करा दोगे। ये सही नहीं है। ये कांग्रेस पार्टी ने कानून लाए थे। 2013 में जो संशोधन बिल लाया गया, जिसके कारण आज ये बिल लाना पड़ा। उसमें कुल मिलाकर दोनों सदनो को मिलाकर 5 घंटे की चर्चा हुई। इस बिल में हमने दोनों सदनों को मिलाकर 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा की। इस पूरी प्रक्रिया को आप ऐसे खारिज नहीं कर सकते हैं। आप 5 घंटे चर्चा करते हैं और उसे लोकतांत्रिक बताते हैं और हम 16 घंटे करते हैं तो वो कुछ नहीं। यहां किसी के परिवार की नहीं चलती है। हम जनता के नुमाइंदे हैं।

वक्फ संशोधन कानून को सभी को मानना ही होगा

उन्होंने कहा कि एक सदस्य द्वारा कहा गया कि यह मिसलीडिंग है। 2013 के कानून में अपील का प्रोविजन था। लेकिन उसमें अपील का प्रावधान उस समय था ही नहीं। सिविल, राजस्व कोर्ट और अन्य प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। ये बताइए जो फैशन है संविधान को लहराने का। कोई फैसला कोर्ट के बाहर कैसे हो सकता है। ये देश की अदालत की पहुंच ही उस फैसले तक नहीं है तो नागरिक अपनी शिकायत लेकर कहां जाएंगे। जिसकी जमीनें हड़प ली गईं, वो कहां जाएगा। हम इसे खारिज कर रहे हैं। ऐसा नहीं चलेगा। अदालत में जाइए शिकायत लेकर, अदालत न्याय करेगी। अदालतें इसीलिए बनी हैं। आप कहते हैं कि माइनॉरिटी इस कानून को स्वीकार नहीं करेगी। धमकी दे रहे हैं। यह संसद का कानून है इसे सबको स्वीकार करना होगा। ये कानून भारत सरकार का है। हर एक पर यह लागू है और सबको इसे स्वीकार करना ही होगा।

2013 के कानून के बाद दोगुनी से ज्यादा हो गई वक्फ की प्रॉपर्टी

उन्होंने कहा कि 1913 से लेकर 2013 तक वक्फ बोर्ड की कुल भूमि 18 लाख एकड़ थी और 2013 से 2025 तक और नई 21 लाख एकड़ भूमि मिली हैं। यानी ये जो 39 लाख एकड़ भूमि है। ये 2013 के बाद जो कानून लाया गया उसका परिणाम है। ये बिल जमीनों को सुरक्षा प्रदान करेगी। किसी की जमीन अब घोषणा मात्र से वक्फ नहीं बनेगी। उसे सुरक्षा देने का हम काम कर रहे हैं। निजी संपत्ति जो आम नागरिकों की है वो भी सुरक्षित हो जाएगा और वक्फ करने के लिए स्वामित्व का ध्यान रखा जाएगा। यानी वक्फ में निजी संपत्ति को ही दान किया जा सकेगा ना कि गांव की संपत्ति को। साथ ही पारदर्शी तरीके से इसका रजिस्ट्रेशन भी करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि का मंदिर बनाने की आई, तो इस देश में खून की नदियां बह जाएंगी, सीएए आया फिर से डर कि मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी। मैं आपके माध्यम से देश के मुसलमानों को अपील करना चाहता हूं। मैंने बहुत झेला है। 2 साल हो गए एक भी मुसलमान की नागरिकता नहीं है। केवल इन्होंने झूठ फैलाया है।

धार्मिक मामलों में गैर-मुस्लिमों की भूमिका नहीं- अमित शाह 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2013 में वक्फ कानून बनाया गया; अगर ऐसा नहीं किया जाता तो शायद इस विधेयक की जरूरत ही नहीं पड़ती। अमित शाह ने कहा कि क्फ परिषद और बोर्ड का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का दुरूपयोग करने वालों को पकड़ना है। अमित शाह ने सदन को बताया है कि वक्फ परिषद और बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल किया गया है; ये निकाय पूरी तरह से घोषित उद्देश्यों के अनुरूप संपत्तियों का प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए हैं। उन्होंने ये भी बताया कि वक्फ परिषद, वक्फ बोर्ड 1995 में अस्तित्व में आए। धार्मिक मामलों में गैर-मुस्लिमों की कोई भूमिका नहीं होगी।

वक्फ और वक्फ बोर्ड में क्या अंतर है?

वक्फ एक इस्लामी कानूनी अवधारणा है, जिसका अर्थ है किसी संपत्ति को स्थायी रूप से धर्मार्थ, सामाजिक या पारिवारिक उपयोग के लिए समर्पित करना। यह संपत्ति आमतौर पर मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, अनाथालय या गरीबों की मदद जैसे कार्यों के लिए दान की जाती है। एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ के रूप में समर्पित हो जाती है, तो उसे बेचा, हस्तांतरित या व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वक्फ का उद्देश्य समाज कल्याण और धार्मिक कार्यों को बढ़ावा देना होता है। वहीं, वक्फ बोर्ड एक सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, संरक्षण और नियमन के लिए बनाई जाती है। भारत में, उदाहरण के लिए, वक्फ बोर्ड राज्य स्तर पर कार्य करते हैं और इनका गठन वक्फ अधिनियम (Waqf Act) के तहत किया जाता है। यह बोर्ड वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड रखता है, उनके उपयोग की निगरानी करता है, और यह सुनिश्चित करता है कि इनका दुरुपयोग न हो। संक्षेप में कहे तो वक्फ वह संपत्ति है जो दान की जाती है, और वक्फ बोर्ड उस संपत्ति को संभालने और उसके नियमों को लागू करने वाला प्राधिकरण है।

कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ में नहीं आएगा- अमित शाह

अमित शाह ने लोकसभा में कहा- “वक्फ अधिनियम और बोर्ड 1995 में लागू हुआ। गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के बारे में सभी तर्क वक्फ में हस्तक्षेप के बारे में हैं। सबसे पहले, कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ में नहीं आएगा। इसे स्पष्ट रूप से समझें। धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन करने वालों में किसी भी गैर-मुस्लिम को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है। हम ऐसा नहीं करना चाहते हैं । यह एक बहुत बड़ी गलत धारणा है कि यह अधिनियम मुसलमानों के धार्मिक आचरण में हस्तक्षेप करेगा और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप करेगा। यह गलत धारणा अल्पसंख्यकों में अपने वोट बैंक के लिए डर पैदा करने के लिए फैलाई जा रही है। मैं आज यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि वक्फ, जो हमारे मुस्लिम भाइयों द्वारा धार्मिक गतिविधियों के लिए दान के माध्यम से बनाया गया एक ट्रस्ट है, उसमें सरकार द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। मुतवल्ली उनके समुदाय से होगा, वाकिफ उनका होगा और वक्फ भी उनका होगा।”

वक्फ धार्मिक है- वक्फ बोर्ड और परिषद नहीं- अमित शाह

अमित शाह ने इसपर आगे कहा कि वक्फ धार्मिक हुआ, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद धार्मिक नहीं है। विरोधी दलों द्वारा वोटबैंक के लिए मुसलमानों को भड़काया जा रहा है। आप लोग (विपक्षी दल) देश को तोड़ दोगे। मैं मुसलमानों से कहना चाहता हूं कि आपके वक्फ में कोई भी गैर मुसलमान नहीं आएगा। लेकिन जो वक्फ बोर्ड है और वक्फ परिषद है, उसे लेकर हम प्रावधान लेकर आए हैं, ताकि वक्फ के नाम पर औने-पौने दाम में संपत्तियों को 100-100 साल के लिए किराए पर देने वालों को पकड़ना और उन्हें निकालना इस बिल का उद्देश्य है।

विपक्षी दल देश तोड़ देंगे- अमित शाह

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा- “वक्फ में पहले तो कोई गैर इस्लामिक सदस्य आएगा ही नहीं। ना मुतवल्लिक गैर इस्लामिक होगा और ना ही कोई दूसरा गैर इस्लामी होगा। अमित शाह ने इसपर आगे कहा कि वक्फ धार्मिक हुआ, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद धार्मिक नहीं है। विरोधी दलों द्वारा वोटबैंक के लिए मुसलमानों को भड़काया जा रहा है। आप लोग (विपक्षी दल) देश को तोड़ दोगे।”

अमित शाह ने अपने भाषण में क्यों लिया लालू प्रसाद यादव का नाम, किस बात का किया खुलासा

‘लालू चाहते थे कि वक्फ में चोरी रोकी जाए’

अमित शाह ने लोकसभा में खुलासा करते हुए कहा, ‘लालू यादव ने ही उस समय कहा था कि सरकार जो ये संशोधन विधेयक पेश किया है, सरकार की पहल का हम स्वागत करते हैं, शाहनवाज हुसैन और माननीय सदस्यों ने जो अपनी बातों को यहां रखा है मैं उसका समर्थन करता हूं। लेकिन ये देखिए कि सारी जमीनें हड़प ली गई हैं, चाहे सरकारी हो या गैर सरकारी। वक्फ बोर्ड में जो काम करने वाले लोग हैं उनके द्वारा सारी प्राइम लैंड को बेच दिया गया है। पटना में ही डाकबंगले की जितनी प्रॉपर्टी थी, सभी पर अपार्टमेंट बन गए, काफी लूट खसोट हुई है। इसलिए मैं चाहता हूं कि भविष्य में आप कड़ा कानून लाइए और चोरी करने वाले लोगों को सलाखों के पीछे भेजिए। लालू जी की इच्छा तो इन्होंने (कांग्रेस) पूरी नहीं की, लेकिन मोदी जी ने पूरी कर दी।’

शाह ने बार-बार क्यों लिया लालू का नाम?

दरअसल, अगले कुछ ही महीनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं, और लोकसभा में अपने भाषण के जरिए शाह कहीं न कहीं यह बताना चाहते थे कि लालू यादव भी वक्फ बोर्ड में सुधार चाहते थे। दरअसल, लालू यादव के नेतृत्व वाली पार्टी RJD वक्फ के मुद्दे पर ही मुसलमानों को बिहार में NDA के खिलाफ करना चाहती है, ऐसे में अगर उनके बीच यह संदेश जाएगा कि लालू खुद वक्फ में सुधार चाहते थे, तो तेजस्वी के हमले की धार कुंद पड़ जाएगी। इस तरह कहा जा सकता है कि लोकसभा में वक्फ बिल पर बोलने के दौरान बार-बार लालू का नाम लेना इसी रणनीति का हिस्सा था।

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