कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा विधायक रहे इरफान सोलंकी और उनके भाई रिजवान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। रंगदारी मांगने के मामले में इरफान और रिजवान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस राजबीर सिंह की सिंगल बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया है। दोनों भाई 2 साल से जेल में हैं। हालांकि जमानत के बाद भी ये दोनों जेल में ही रहेंगे। इरफान सोलंकी की गैंगस्टर जबकि रिजवान की दो मामलों में जमानत अभी लंबित है।
6 दिसंबर 2022 को अकील अहमद खान ने उनके खिलाफ जाजमऊ थाने में रंगदारी मांगने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। इरफान सोलंकी की तरफ से आज अधिवक्ता इमरान उल्ला और विनीत विक्रम ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल मौजूद रहे।
पिछले साल जून में सुनाई थी सजा
बता दें कि सीसामऊ से विधायक रह चुके इरफान सोलंकी को पिछले साल 7 जून को कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई थी। भाई रिजवान सोलंकी को भी सात साल की सजा सुनाई थी। सोलंकी भाइयों पर एक महिला के घर में आगजनी के मामले में दोषी माना था। दरअसल,जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ने इरफान सोलंकी, रिजवान सोलंकी व उनके साथियों पर घर में आग लगाने का आरोप लगाया था। महिला के मुताबिक, 7 नवंबर 2022 को जब वो परिवार के साथ शादी में गई थी, इसी बीच इरफान, रिजवान व उनके साथियों ने बेटे को पीटा और घर में आग लगाकर उसे धकेलने की कोशिश की।
मामले में जब सोलंकी पर मामला दर्ज हुआ तो वो फरार हो गए थे। इस मामले के मुख्य गवाह विष्णु सैनी की इसी साल जनवरी में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। विष्णु ने इरफान के मामले में गवाही दी थी। उनकी गवाही की वजह से ही इरफान को सात साल की सजा हुई थी। सजा के खिलाफ इरफान ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की।
उपचुनाव में पत्नी ने दर्ज की जीत
सात साल की सजा होने के कारण इरफान सोलंकी की विधानसभा की सदस्यता निरस्त हो गई थी। उनकी विधायिकी जाने के बाद सीसामऊ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे, जिसमें उनकी पत्नी नसीम सोलंकी ने जीत दर्ज की थी।
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