Unnao: उन्नाव जिले की भौगोलिक स्थिति एवं नामकरण कैसे हुआ एवं कैसा है जनपद का राजनीतिक इतिहास, जानने के लिए यहां पढ़े
उन्नाव जिले का एक विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
- भौगोलिक स्थिति और नामकरण
नामकरण: उन्नाव का नाम लगभग 1200 साल पहले बिसेन राजपूत राजा “उन्नावंत सिंह” के नाम पर पड़ा था, जिन्होंने यहां एक किला बनवाया और इसका नाम ‘उन्नाव’ रखा।
स्थिति: यह जिला गंगा और सई नदियों के बीच स्थित है और इसका आकार लगभग एक समांतर चतुर्भुज की तरह है।
सीमाएं: यह उत्तर में हरदोई, पूर्व में लखनऊ, दक्षिण में रायबरेली और पश्चिम में गंगा नदी से घिरा है, जो इसे कानपुर और फतेहपुर जिलों से अलग करती है।
क्षेत्रफल: जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 4,558 वर्ग किलोमीटर है।
जनसांख्यिकी (2011 की जनगणना के अनुसार)
कुल जनसंख्या: 3,108,367
लिंगानुपात: 907 महिला प्रति 1000 पुरुष (राष्ट्रीय औसत 940 से कम)।
साक्षरता दर: 66.37% (पुरुष: 75.05%, महिला: 56.76%)
धर्म:
हिंदू: 87.89%
मुस्लिम: 11.69%
शहरी और ग्रामीण जनसंख्या: यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण जिला है, जिसकी 80% से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।
- प्रशासनिक संरचना
तहसील: उन्नाव, बांगरमऊ, हसनगंज, सफीपुर, पुरवा, बीघापुर।
विकास खंड: गंज मुरादाबाद, बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी, सफीपुर, मियांगंज, औरास, हसनगंज, नवाबगंज, पुरवा, असोहा, हिलाौली, बीघापुर, सुमेरपुर, बिछिया, सिकंदरपुर सिरौसी, सिकंदरपुर करण।
ग्राम पंचायत: 1040
- अर्थव्यवस्था और उद्योग
कृषि: उन्नाव की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यहां की प्रमुख फसलें गेहूं, चावल, गन्ना और आलू हैं। यह आम और अमरूद जैसे फलों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है।
उद्योग: उन्नाव अपने चमड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई चमड़े के कारखाने (जैसे मिर्ज़ा टेनर्स, रहमान एक्सपोर्ट्स) और एक लेदर टेक्नोलॉजी पार्क है। इसके अलावा, जिले में जरी-जरदोजी का काम, छपाई, रंगाई और रसायन उद्योग भी महत्वपूर्ण हैं।
पिछड़ा क्षेत्र: 2006 में, पंचायती राज मंत्रालय ने उन्नाव को देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में से एक घोषित किया था, और इसे पिछड़े क्षेत्र अनुदान कोष (BRGF) कार्यक्रम से धन प्राप्त होता है।इतिहास और संस्कृति
इतिहास: प्राचीन काल में, यह क्षेत्र ‘कोसल’ साम्राज्य का हिस्सा था। अंग्रेजों द्वारा अवध के विलय के बाद 1856 में उन्नाव जिला अस्तित्व में आया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी जिले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संस्कृति:
भाषा: मुख्य रूप से हिंदी और उर्दू बोली जाती है। अवधी, ब्रज और भोजपुरी जैसी क्षेत्रीय बोलियां भी प्रचलित हैं।
कला: जरी-जरदोजी का काम यहां की एक बहुत ही समृद्ध और पारंपरिक हस्तकला है।
साहित्य: इस जिले को ‘साहित्य की भूमि’ भी कहा जाता है।
प्रमुख स्थान और पर्यटन:
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य: यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, खासकर पक्षी प्रेमियों के लिए।
संचांकोट: यह बांगरमऊ तहसील में एक महत्वपूर्ण प्राचीन स्थल है।
उन्नाव जिले का एक समृद्ध राजनीतिक इतिहास रहा है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक भारतीय राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है।
प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास:
प्राचीन काल में उन्नाव का क्षेत्र ‘कोसल’ और बाद में ‘अवध’ के प्रांत के अंतर्गत आता था।
ऐसा माना जाता है कि 12वीं शताब्दी में एक चौहान राजपूत, गोडो सिंह ने सवाई गोडो नामक एक शहर की स्थापना की थी। बाद में, कन्नौज के शासकों ने खांडे सिंह को यहां का राज्यपाल नियुक्त किया। उनके लेफ्टिनेंट उन्वंत सिंह ने उन्हें मारकर एक किले का निर्माण किया और अपने नाम पर इस स्थान का नाम “उन्नाव” रखा।
मुगल काल में, यह क्षेत्र अवध के सूबे के लखनऊ सरकार के अधीन था। अवध के नवाबों के शासनकाल के दौरान, जिले का पूर्वी भाग पुरवा के चकले के अंतर्गत आता था।
आधुनिक राजनीतिक इतिहास (1857 के बाद):
1857 के सिपाही विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने अवध के बैसवारा चकले को विभाजित कर उन्नाव को एक नया जिला बनाया।
स्वतंत्रता संग्राम में उन्नाव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यहां के कई देशभक्तों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, जिनमें राजा राव राम बक्स सिंह, मौलाना हसरत मोहानी और पंडित विशम्भर दयाल त्रिपाठी प्रमुख हैं।
उन्नाव के कई स्वतंत्रता सेनानियों और साहित्यकारों ने भारतीय राजनीति और संस्कृति को प्रभावित किया, जैसे प्रताप नारायण मिश्रा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, डॉ. रामविलास शर्मा, और डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव:
आजादी के बाद से उन्नाव लोकसभा सीट पर कांग्रेस का लंबे समय तक दबदबा रहा है। 1952 से 2019 तक 16 लोकसभा चुनावों और एक उपचुनाव में, कांग्रेस 9 बार जीती है, जबकि भाजपा 4 बार जीती है। समाजवादी पार्टी, बसपा और जनता पार्टी ने भी एक-एक बार जीत हासिल की है।
उन्नाव सदर विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। 1985 में मनोहर लाल ने लोकदल के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस की माधुरी शुक्ला को हराया और इस सीट पर अपने परिवार का दबदबा कायम किया। उनके बाद उनके बेटे दीपक कुमार और भाई राम कुमार ने भी इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। 2015 के उपचुनाव में भाजपा के पंकज गुप्ता ने यहां जीत हासिल की।
हाल के वर्षों में, भाजपा का उन्नाव में प्रभाव बढ़ा है, और 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में साक्षी महाराज ने यहां से जीत हासिल की है।
वर्तमान स्थिति:
वर्तमान में, उन्नाव जिले की सभी 6 विधानसभा सीटें (बांगरमऊ, सफीपुर, मोहन, उन्नाव, भगवंतनगर और पुरवा) भाजपा के पास हैं।
उन्नाव लोकसभा सीट में भी भाजपा का दबदबा है, और यह उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है।
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