प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार 7 अक्टूबर, 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, हरियाणा और मुंबई में कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी को अंजाम दिया है. यह सर्च ऑपरेशन किया एक ‘टेक सपोर्ट स्कैम’ केस से जुड़ी है. ED की जांच PMLA के तहत शुरू की गई थी, जो दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज की गई कई FIRs पर आधारित है. इन एफआईआर में करण वर्मा और उसके साथियों पर धोखाधड़ी का आरोप है.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली के रोहिणी, पश्चिम विहार और राजौरी गार्डन इलाकों में कई गैर-कानूनी कॉल सेंटर चला रहे थे. इन कॉल सेंटर्स से विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिका के लोगों को कॉल की जाती थी. ठग खुद को माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, Charles Schwab Financial Services जैसी बड़ी कंपनियों के कस्टमर सपोर्ट एजेंट बताकर बात करते थे. कई बार वे खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी के अफसर के रूप में पेश करते थे और लोगों को डराकर पैसे वसूलते थे.
इन ठगों का एक खास तरीका था, BSOD (Blue Screen of Death) ट्रिक. ये लोगों के कंप्यूटर पर फेक पॉप-अप मैसेज दिखाते थे, जिसमें ऐसा लगता था कि सिस्टम में कोई गंभीर समस्या आ गई है. पॉप-अप में लिखा होता – “Call this number for help.” जैसे ही कोई व्यक्ति उस नंबर पर कॉल करता. ठग उसे ‘फेक टेक सपोर्ट’ की आड़ में फंसा लेते और सिस्टम ठीक करने के नाम पर पैसे ठग लेते.
पीड़ितों से वसूले गए पैसे को आरोपी क्रिप्टो करेंसी, गिफ्ट कार्ड्स आदि में बदल देते थे. फिर इन पैसों को हवाला चैनल के जरिए भारत में अपने खातों और साथियों तक पहुंचाया जाता था. ED की जांच में खुलासा हुआ है कि इन ठगों के इस्तेमाल किए गए क्रिप्टो वॉलेट्स में यूएस डॉलर के मिलियंस में ट्रांजैक्शन हुए हैं.
छापेमारी में ईडी के हाथ लगे कई अहम सबूत
सर्च ऑपरेशन के दौरान ED को दिल्ली में एक और गैर-कानूनी कॉल सेंटर मिला, जो इन्हीं लोगों की ओर से चलाया जा रहा था. यहां से भी विदेशी नागरिकों को फर्जी टेक्निकल हेल्प के बहाने ठगा जा रहा था. ED ने कई डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स को जब्त किया है. एजेंसी अब ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और विदेशों में इनके कनेक्शन कहां-कहां हैं.
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