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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का वक्त तय, पुतिन करीब 4 साल बाद दिसंबर में भारत की यात्रा पर आ रहे, क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने जानकारी दी

लंबे समय से चल रहे कयासों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे का वक्त तय हो गया है. पुतिन करीब 4 साल बाद दिसंबर में भारत की यात्रा पर आ रहे हैं. क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने आज शुक्रवार को पुतिन के भारत के दौरे के बारे में जानकारी दी. पुतिन इससे पहले आखिरी बार 6 दिसंबर 2021 को भारत के दौरे पर आए थे.

यूरी उशाकोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन अगले हफ्ते सोमवार को चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और अपनी भारत यात्रा की तैयारियों पर चर्चा करेंगे. उशाकोव ने कहा, “एससीओ प्लस बैठक (1 सितंबर को) के ठीक बाद, हमारे राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात करेंगे.”

तियानजिन में मोदी और पुतिन करेंगे मुलाकात

पुतिन की भारत यात्रा और उससे जुड़ी तैयारियों के बारे में उन्होंने कहा, “खासतौर से बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि दिसंबर में हमारे राष्ट्रपति पुतिन की आगामी भारत यात्रा की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी.” उन्होंने कहा कि तियानजिन में, इस साल दोनों नेताओं की पहली मुलाकात होगी, हालांकि नियमित रूप से दोनों शीर्ष नेता फोन पर लगातार संपर्क में रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हमारे देश एक विशेष रणनीतिक साझेदारी (special strategic partnership) से बंधे हुए हैं. इस संबंध में एक प्रासंगिक बयान दिसंबर 2010 में पारित किया गया था, जिसका मतलब है कि इस साल तब से यह 15वीं वर्षगांठ है.” पीएम मोदी पिछले साल पुतिन के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन और कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 2 बार रूस के दौरे पर गए थे. रूसी राष्ट्रपति पुतिन वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आ रहे हैं.

ट्रंप के टैरिफ विवाद के बीच पुतिन की भारत यात्रा

पुतिन की इस भारत यात्रा का ऐलान ऐसे समय किया गया है जब पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना करके 50 फीसदी तक कर दिया है, इसमें भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है.

अमेरिका की ओर से किए जा रहे हमले और रूस से कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए, भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार को देखते हुए है. साल 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी है, जिसमें कच्चे तेल पर भी प्रतिबंध शामिल हैं. लेकिन भारत लगातार रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा.

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