इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp लोगों के बीच काफी पॉपुलर है लेकिन क्या आपको पता व्हाट्सऐप की ‘बादशाहत’ को चुनौती देना वाला क्लाउड बेस्ड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram अक्सर मुश्किलों में घिरा रहा है. भले ही इस ऐप को सिक्योर और प्राइवेसी के मामले में बेहतरीन बताया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल कई बार कार्यकर्ताओं, विरोधियों और यहां तक कि चरमपंथी समूहों (Extremist groups) द्वारा भी किया जाता है. व्हाट्सऐप की ‘छुट्टी’ करने की मंशा के साथ आए इस ऐप पर कुछ देशों ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.
मानवाधिकार वकील और कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल किए जाने के बाद 2015 से टेलीग्राम ऐप पर चीन में बैन लगा हुआ है. अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगा दिया था.
विरोध प्रदर्शनों में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने और “गलत तरह के कंटेंट” के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल करने की वजह से 2018 में ईरान ने टेलीग्राम ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था. प्रतिबंध से पहले टेलीग्राम देश का सबसे लोकप्रिय ऐप था.
वियतनाम
राज्य-विरोधी दस्तावेजों और गलत जानकारी के प्रसार के लिए टेलीग्राम के इस्तेमाल का हवाला देते हुए 2025 में वियतनाम सरकार ने इस ऐप पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था.
पाकिस्तान
सुरक्षा संबंधी चिंताओं और लोकल कंटेंट रेग्युलेशन का पालन करने से इनकार करने के कारण पाकिस्तान में भी क्लाउड बेस्ड प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर बैन लगा दिया गया है.
थाईलैंड
सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थाईलैंड में इस क्लाउड बेस्ड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया था, यही वजह है कि 2020 में थाईलैंड की सरकार ने इस ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था.
यूक्रेन
सितंबर 2024 में यूक्रेन के साइबर सिक्योरिटी सेंटर ने सरकारी एजेंसियों और सैन्य कर्मियों के ऑफिशियल डिवाइस पर टेलीग्राम का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह प्रतिबंध सैन्य खुफिया जानकारी के खुलासे के कारण लगाया गया है कि जिसमें बताया गया था कि Russian स्पेशल सर्विस टेलीग्राम यूजर्स के पर्सनल मैसेज को एक्सेस कर सकते हैं. यही वजह है कि इस ऐप पर यू्क्रेन में भी बैन है.
RB News World Latest News