महाराष्ट्र के मुंबई के पवई इलाके में स्थित RA स्टूडियो में 17 बच्चों समेत 20 लोगों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया. रोहित ने मासूम बच्चों को वेब सीरिज के लिए ऑडिशन के बहाने बुलाया और उन्हें बंधक बना लिया था. इसके बाद रोहित का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें उसने खुद बताया कि उसने ये सब कुछ एक प्लानिंग के तहत किया है, साथ ही उसने कई सवाल भी किए थे. अब इस केस में एक नया खुलासा हुआ है. रोहित आर्या के परिवार ने बताया कि सरकार ने रोहित आर्या के काम का पैसा नहीं दिया था, जिस वजह से वह सदमे में था. बताया जा रहा है कि उसने पूर्व मंत्री दीपक केसरकर के खिलाफ करीब 12 दिनों तक पुणे में अनशन भी किया था. परिवार के मुताबिक रोहित आर्या न पागल था और न ही मानसिक रूप से कमजोर था. उसके काम का पैसा सरकार ने नहीं दिया, जिसके चलते वो काफी दिनों से गहरे सदमे में था और इस सदमे के पैनिक अटैक में रोहित ने ये कदम उठाया.
हालांकि, इस बात की तस्दीक अब तक राज्य सरकार या मुंबई पुलिस ने नहीं की है. रोहित आर्या के परिवार के मुताबिक पूर्व मंत्री दीपक केसरकर के खिलाफ 12 दिनों तक रोहित पुणे में अनशन पर भी बैठा था. पुणे में शिक्षा मंत्री रहे दीपक वसंत केसरकर के खिलाफ 12 दिनों तक अनशन पर बैठने के दौरान रोहित आर्या को अचानक दौरा भी पड़ा था. मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कराया. रोहित ने उस समय आरोप लगाया था कि उसने राज्य सरकार के ‘माझी शाळा, सुंदर शाळा (मेरा स्कूल, सुंदर स्कूल)’ प्रोजेक्ट का डिजाइन तैयार किया था, लेकिन सरकार ने न तो उसे कोई भुगतान किया और न ही प्रोजेक्ट में उसका नाम दिया.
इस दौरान पुणे शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के पदाधिकारी सूरज लोखंडे और संभाजी ब्रिगेड के नेता संतोष शिंदे भी मौजूद थे. रोहित ने आरोप लगाया था कि सरकार ने वादा तोड़ा और उसे फंसाने की कोशिश की. रोहित ने पुणे में बताया था कि 3 अगस्त को पूर्व मंत्री दीपक केसरकर खुद उसके घर आए थे और उसकी बात सुनी थी. उन्होंने भरोसा दिलाया था कि 5 अगस्त तक मामला सुलझा दिया जाएगा, लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ. 9 अगस्त को फिर बैठक हुई, जहां सह-सचिव महाजन ने कहा कि आपकी गलती की जांच के बिना कुछ नहीं किया जा सकता.
“मेरे काम का इस्तेमाल किया गया”
परिवार का कहना है कि रोहित ने परिवार को बताया था कि उसे फंसाने की कोशिश की जा रही है. उसने अनशन के दौरान कहा था, “अगर मुझे कुछ हो जाए तो कोई इलाज न करे. जब तक मेरी मांगें पूरी नहीं होतीं. मैं अनशन नहीं तोड़ूंगा. मेरे काम का इस्तेमाल किया गया, नाम और पैसा दोनों छीना गया.” आरोप है कि उसने 2022 में ‘लेट्स चेंज’ नाम की फिल्म के आधार पर इस अभियान का कॉन्सेप्ट तैयार किया था और PLC स्वच्छता मॉनिटर प्रोजेक्ट चलाया. सरकार ने उसी विचार को आगे बढ़ाकर ‘मेरा स्कूल, सुंदर स्कूल’ प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया.
रोहित का आरोप था कि पूरा काम उससे करवाया गया और बाद में उसे बाहर कर दिया गया. पैसे नहीं दिए और नाम भी हटा दिया गया. रोहित ने कहा कि सरकार ने मेरी मेहनत को नजरअंदाज किया और मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की. अब मीडिया और जनता को जागना होगा. राज्य सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
RB News World Latest News