पड़ोसी देश पाकिस्तान गले तक कर्ज में डूबा हुआ है. गुरुवार को एक रिपोर्ट में सामने आया है कि पाकिस्तान ने अब एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank) से 7 अरब अमेरिकी डॉलर के लोन की मांग की है. देश ने इस लोन की मांग एक प्रमुख रेलवे लाइन को अपग्रेड करने के लिए की. पाकिस्तान ने इसके लिए चीन से भी मदद मांगी थी लेकिन चीन ने कथित तौर पर इस प्रोजेक्ट को समर्थन देने से इनकार कर दिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, मनीला स्थित इस बैंक (ADB) ने प्रोजेक्ट के बड़े आकार को देखते हुए इसे हिस्सों में बांटकर फंड देने का विकल्प चुना है. पाकिस्तान ने एडीबी (ADB), एआईआईबी (AIIB) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से पूरी फंडिंग का मुद्दा बुधवार को इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब की एडीबी अध्यक्ष मासातो कांदा के साथ हुई बैठक में उठाया था.
एडीबी (ADB) ने कराची-रोहरी सेक्शन के लिए डिज़ाइन दस्तावेज़ मांगे हैं, ताकि असली फंडिंग की ज़रूरत कितनी है इस बात का अंदाजा लगाया जा सके. सूत्रों ने कहा कि एडीबी इस हिस्से के लिए लगभग 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 60% फंड) उपलब्ध कराने के लिए एआईआईबी (AIIB) के साथ साझेदारी कर सकता है. उम्मीद है कि प्लानिंग कमीशन को इस हफ्ते संशोधित परियोजना लागत का ब्योरा मिलेगा, ताकि असली लागत का पता लगाया जा सके.
कितना आएगा प्रोजेक्ट में खर्च
एडीबी (ADB) ने नवंबर तक 1 करोड़ डॉलर (USD 10 million) का प्रोजेक्ट रेडीनेस फंड देने का भरोसा दिया है. इसका इस्तेमाल पहले चीन द्वारा बनाई गई एमएल-1 (ML-I) की व्यवहार्यता रिपोर्ट की जांच करने, परियोजना के विस्तृत डिज़ाइन की पुष्टि करने और रोहरी-मुल्तान खंड की समीक्षा के लिए किया जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, इन नतीजों के आधार पर एडीबी (ADB) एआईआईबी (AIIB) और यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) के साथ मिलकर किस्तों में कर्ज देने की सुविधा को मंजूरी दे सकता है. सरकारी अनुमान के मुताबिक, कराची-रोहरी खंड के लिए 2 अरब डॉलर और रोहरी-मुल्तान खंड के लिए 1.6 अरब डॉलर की जरूरत होगी. यानी सिर्फ इन दो हिस्सों पर ही 3.6 अरब डॉलर का खर्च आएगा.
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री चाहते थे कि अगले साल जून में एडीबी के पैसे से बनने वाली एमएल-1 परियोजना का काम शुरू हो जाए. लेकिन, रेलवे मंत्रालय और एडीबी ने कहा कि यह काम दिसंबर 2025 में ही शुरू हो पाएगा. एडीबी के अध्यक्ष ने कहा कि पैसा तभी मिलेगा, जब प्रोजेक्ट रेडीनेस फंड रिपोर्ट के नतीजे सही आएंगे.
चीन ने किया समर्थन करने से इनकार
रिपोर्ट में बताया गया कि चीन ने पहले पाकिस्तान से कहा था कि परियोजना की लागत लगभग 10 अरब डॉलर से घटाकर 6.7 अरब डॉलर की जाए, ताकि यह आर्थिक रूप से संभव हो सके. यह परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत घोषित एकमात्र “रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण” परियोजना थी. इस्लामाबाद चाहता था कि चीन इसे रियायती कर्ज पर फंड करे, लेकिन बीजिंग ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया.
यह प्रोजेक्ट पहले से ही 7 साल देरी का शिकार है, क्योंकि पाकिस्तान पर भारी कर्ज है. पाकिस्तान चाहता था कि चीन लागत का 85% हिस्सा कर्ज के रूप में दे, लेकिन वो तैयार नहीं हुआ.
सूत्रों के अनुसार, कराची-रोहरी खंड का जल्दी पूरा होना बहुत जरूरी है, ताकि रेको डिक (Reko Diq) खदानों से निकलने वाला तांबा और सोना ढोया जा सके. रेको डिक माइनिंग कंपनी 2028 तक प्रोडक्शन शुरू करने की योजना बना रही है, जिसके लिए समय पर और सुचारू परिवहन के लिए रेलवे नेटवर्क अनिवार्य होगा.
RB News World Latest News