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मध्य प्रदेश: डिंडोरी कलेक्टर ऑफिस में जनसुनवाई के दौरान चटुआ गांव के रहने वाले किसान उमेश्वर बलदाऊ जमीन विवाद से परेशान होकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचे.

मध्य प्रदेश के डिंडोरी कलेक्टर ऑफिस में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. चटुआ गांव के रहने वाले किसान उमेश्वर बलदाऊ जमीन विवाद से परेशान होकर कलेक्टर ऑफिस पहुंचे. अपनी पीड़ा और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए उन्होंने सांप की तरह जमीन पर रेंगते ऑफिस के बाहर से अंदर तक पहुंचे और पहुंचते ही अधिकारियों को दंडवत किया. इस दृश्य ने वहां मौजूद अधिकारियों और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा

चाचा के साथ चल रहा जमीनी विवाद

किसान उमेश्वर बलदाऊ ने बताया कि पिछले चार-पांच साल से उनके चाचा के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. आरोप है कि चाचा ने अपने नाम अधिक हिस्सा दर्ज करवा लिया है. यह मामला कोर्ट और तहसील दोनों जगह विचाराधीन है. किसान के अनुसार, उन्होंने अपने आवेदन में पूरा विवरण दिया है. जुलाई में तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण की कार्रवाई भी की गई थी, लेकिन 20 फरवरी 2026 को उसी जमीन के निराकरण के लिए दोबारा आदेश जारी किए गए. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका.

जनसुनवाई में आवेदन दिया, पर नहीं हुई कार्यवाही

उमेश्वर बलदाऊ का कहना है कि वह दो-तीन बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुके हैं, जिसकी पावती भी उनके पास है. उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और इसी कारण उन्हें बार-बार परेशान किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा सीमांकन की प्रक्रिया में टालमटोल की जा रही है. कई बार समय दिया जाता है, लेकिन बाद में कथित रूप से औपचारिक पंचनामा बनाकर कार्रवाई अधूरी छोड़ दी जाती है. किसान का कहना है कि आज तक उनके खेत की सही मेढ़ (सीमा) स्पष्ट नहीं की गई है.

जनसुनवाई के दौरान किसान ने जिला पंचायत के सीईओ दिव्यांशु चौधरी को अपनी समस्या से अवगत कराया. उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द विवाद का समाधान कराने की मांग की. किसान ने कहा कि यदि वह गलत हैं तो उन्हें दंडित किया जाए, लेकिन यदि दूसरा पक्ष या कोई अधिकारी दोषी है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.

कलेक्टर से नहीं हुई मुलाकात

किसान ने बताया कि उनकी कलेक्टर से सीधे मुलाकात नहीं हो सकी. बाहर ही अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और आश्वासन दिया कि उनका कार्य शीघ्र कर दिया जाएगा. उनका आवेदन ले लिया गया है, लेकिन अभी तक कोई लिखित आदेश या प्रमाण उन्हें नहीं दिया गया है. किसान का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित रूप में सीमांकन और निराकरण का प्रमाण नहीं मिलेगा, तब तक उन्हें संतोष नहीं होगा.

इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक किसान को अपनी बात सुनाने के लिए सांप की तरह रेंगकर दंडवत करना पड़े, यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्रता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है और क्या किसान को उसका हक मिल पाता है.

About Manish Shukla

Manish Shukla
मैं मनीष शुक्ला RBNEWS PVT LTD नेटवर्क में मुख्य संपादक एवं डायरेक्टर हूं. मीडिया उद्योग में 4 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर पाठको को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली खबरों को सत्यतापूर्वक पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं यु.पी., एम.पी., बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल एवं दिल्ली सरकार की राजनीतिक व अपराधिक घटनाओं, एवं प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ कुछ इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं.

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