Jammu Kashmir Transferred: जम्मू-कश्मीर में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) के 48 अधिकारियों के तबादले के आदेश दिए. उपराज्यपाल के इस कदम के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार (4 अप्रैल) को सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और सहयोगी दलों के विधायकों की तत्काल बैठक बुलाने का निर्णय लिया.
बैठक में गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है. बैठक के एजेंडे को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता चुप्पी साधे हुए हैं. हांलाकि, बैठक के दौरान प्रशासनिक मामलों में राजभवन द्वारा कथित हस्तक्षेप पर चर्चा होने की उम्मीद है, जो निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
LG ने 48 अधिकारियों के तबादले के आदेश दिए
नौकरशाही पर पूर्ण नियंत्रण के प्रयास के रूप में देखे जा रहे इस कदम के तहत उपराज्यपाल ने दो दिन पहले 14 अतिरिक्त उपायुक्त और 26 सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट समेत जेकेएएस के 48 अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया. सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने LG सिन्हा को पत्र लिखकर एकतरफा फैसले की समीक्षा करने को कहा है और अखिल भारतीय सेवा कैडर से बाहर के अधिकारियों का तबादला और नियुक्ति निर्वाचित सरकार का विशेषाधिकार होने का जिक्र किया है.
CM उमर अब्दुल्ला ने LG को पत्र लिखकर क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, अब्दुल्ला ने पत्र में कहा कि ऐसे आदेश निर्वाचित सरकार के कामकाज और अधिकार को कमजोर करते हैं. बताया जाता है कि अब्दुल्ला ने यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाया था और शिकायत की थी कि तबादलों सहित उपराज्यपाल के कई कदम उनकी सरकार के अधिकार क्षेत्र में ‘‘अतिक्रमण’’ हैं. शुक्रवार की बैठक के संबंध में घोषणा NC के मुख्य सचेतक मुबारक गुल ने की. उन्होंने बैठक की अहमियत पर जोर देते हुए सभी सहयोगी सदस्यों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया.
किन-किन जगहों पर हुए तबादले?
उपराज्यपाल ने पुलवामा, कुपवाड़ा, बसोहली, डोडा, अनंतनाग, सुंदरबनी, राजौरी, नौशेरा, बारामूला, श्रीनगर, गांदरबल, कठुआ, भद्रवाह और हंदवाड़ा में अतिरिक्त उपायुक्तों के तबादले और नियुक्ति के आदेश दिए हैं. सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा यह आदेश ऐसे समय में जारी किया गया है, जब निर्वाचित सरकार लगभग एक माह पहले बनाई गई कार्य नियमावली के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है.
जम्मू-कश्मीर में बहुप्रतीक्षित विधानसभा चुनावों से पहले गृह मंत्रालय ने पिछले साल जुलाई में ‘‘कार्य संचालन नियमों’’ में संशोधन किया था, जिसमें पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) जैसी अखिल भारतीय सेवाओं और अभियोजन मंजूरी देने से संबंधित मामलों में उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाया गया था.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने छह मार्च को विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा था, ‘‘जब तक हमें पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता, स्पष्टता के लिए कार्य नियमावली तय करना आवश्यक है. इसमें कुछ समय लगा, लेकिन कल (पांच मार्च) रात आठ बजे हमने कैबिनेट की बैठक बुलाई और नियमावली को अंतिम रूप दिया. कैबिनेट ने नियमावली को मंजूरी दे दी है.’’
न्होंने यह भी कहा था कि नियमों को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजा गया है और हमें उम्मीद है कि उन्हें मंजूरी मिल जाएगी. अब्दुल्ला ने पहले केंद्र-शासित प्रदेश में दोहरे शासन मॉडल की खुले तौर पर आलोचना की थी और इसे ‘विनाशकारी’ बताया था. वहीं, कांग्रेस ने तबादले को लेकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के फैसले की आलोचना की. कांग्रेस ने कहा कि उपराज्यपाल को अपना निर्णय घोषित करने से पहले कार्य नियमावली के अनुमोदन का इंतजार करना चाहिए था.
कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने क्या कहा?
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम अहमद मीर ने कहा, ‘‘उपराज्यपाल के लिए यह उचित होता कि वह कुछ समय प्रतीक्षा करते, क्योंकि कार्य नियमावली अभी स्वीकृति के लिए लंबित है. उपराज्यपाल को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए था.’’ जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता मीर ने कहा कि सरकार ने पहले ही कार्य नियमावली का प्रस्ताव कर दिया है और उन्हें मंजूरी के लिए नयी दिल्ली भेजा गया है. मीर ने कहा कि वर्तमान कार्य नियमावली के अनुसार, स्थानीय जेकेएएस अधिकारियों का तबादला मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है.