दिल्ली दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अल फलह यूनिवर्सिटी के खिलाफ दो अलग अलग एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अल फलह यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक एफआईआर चीटिंग की दर्ज की है, जबकि दूसरी एफआईआर फॉर्जरी की धाराओं में दर्ज की गई है। आज दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ओखला स्थित अल फलह यूनिवर्सिटी के दफ्तर पहुंची थी। दिल्ली पुलिस ने अल फलाह यूनिवर्सिटी को एक नोटिस दिया है, साथ ही कुछ डाक्यूमेंट्स यूनिवर्सिटी की तरफ मांगे गए हैं। इसके साथ ही दिल्ली ब्लास्ट केस में आरोपियों के बारे में कई खुलासे हुए हैं
जर्मन राजदूत ने कहा-ये चौंकाने वाली घटना थी
दिल्ली आतंकी विस्फोट मामले पर भारत में जर्मन राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने कहा, “यह एक चौंकाने वाली घटना है। हम पूरी तरह से हैरान रह गए। जो कुछ हुआ उसे देखकर मुझे बहुत दुख हुआ। मेरी संवेदना उन लोगों के साथ है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और जो घायल हुए हैं। हम समाचारों में सब कुछ देख रहे हैं, और यह स्पष्ट रूप से एक आतंकी हमला है…”
फॉरेंसिक जांच में मिले 39 वायस कॉल्स
आतंकी शाहीन -आरिफ- मुजम्मिल का सीक्रेट नेटवर्क बेनकाब, फॉरेंसिक जांच में मिले 39 वायस कॉल्स, 43 व्हाट्सएप कॉल, और 25 डिलीटेड मैसेज ने खोले राज?
CNG वाली गाड़ियों में धमाके हो रहे थे-बोले पुलिसकर्मी
जब ब्लास्ट हुआ था तब थान सिंह गौरीशंकर मंदिर की सीढ़ी ओआर थे। दौड़कर स्पॉट पर पहुचे। सबसे पहले आग के बीच मे घिरी एक महिला को निकाल। उसके बाद एक एक करके वहां से लोगों को निकालकर हॉस्पिटल भिजवाया। CNG वाली गाड़ियों में छोटे मोटे धमाके हो रहे थे। सब लोग मना कर रहे थे कि लेकिन जान की परवाह किए बगैर एक एक घायलों को हॉस्पिटल पहुचाया।
ब्लास्ट के बाद अंधेरा छा गया था-बताया पुलिसकर्मी ने
लालकिला ब्लास्ट में सबसे पहले स्पॉट पर पहुचने वाले दिल्ली पुलिस से हेड कांस्टेबल थान सिंह और अजय कुमार ने बताया, ब्लास्ट की जगह से 30 फुट की दूरी पर थे। ब्लास्ट के बाद अंधेरा छा गया था। चारों तरफ लोगों चीख पुकार कर रहे थे। CNG गाड़ियों में आग लगी हुई थी। गाड़ियों के शीशे तोड़कर लोगों को बाहर निकाला। हॉस्पिटल भेजा। ये भी नहीं देख रहे थे कि किसकी क्या हालत है। एक एक लोगों को वहां से निकाला और ऑटो, रिक्शा, ई रिक्शा, कार जो मिला उसी में लोगों को हॉस्पिटल भिजवाया। बर्दी खून से लाल हो गयी थी। पुलिस वालों ने लोगों की मदद से 19- 20 लोगों की जान बचाई।
डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन के संपर्क में था उमर
दिल्ली के लाल किले धमाके की जांच में नया सुराग मिला है, फरीदाबाद की मोबाइल शॉप में दो फोन के साथ दिखे उमर ने विस्फोट से पहले मोबाइल गायब किए और वह डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन के संपर्क में था, श्रीमा व सिग्नल ग्रुप्स से प्लान तैयार करता था और उसके ग्रुप ने 26 लाख रुपये जुटाए थे और 26 क्विंटल NPK खाद से IED बनाने की तैयारी की थी। उसका सीसीटीवी भी सामने आया है।
मसूद अजहर की बहन के संपर्क में थी शाहीन
सूत्रों ने यह भी बताया कि शाहीन, जो जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की बहन सहीदा अजहर के भी निकट संपर्क में थी और उसके निर्देश पर देश में आतंकी संगठन की महिला शाखा स्थापित करने की योजना बना रही थी, अपना नेटवर्क फैलाने में कामयाब रही..
पाक सैन्य डॉक्टर के संपर्क में थी शाहीन
लखनऊ की डॉ. शाहीन शाहिद, जिन्हें कुछ दिन पहले फरीदाबाद से ‘श्वेत आतंकी मॉड्यूल’ का सदस्य होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था, जिस पर दिल्ली विस्फोट के पीछे होने का संदेह था, वो एक पाकिस्तानी सैन्य डॉक्टर के संपर्क में थीं।
डॉक्टर टेरर ग्रुप पर रेड्स और बड़े खुलासे
30 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर पुलिस फरीदाबाद पुलिस के पास आती है और इनके पास पुलिस सर्च वारेंट के साथ आती है, सीपी फरीदाबाद क्राइम ब्रांच को depute करते है। 30 अक्टूबर को अल्फ़ला यूनिवर्सिटी से मुझम्मिल को गिरफ्तार करते है और ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू कश्मीर ले जाते हैं।
14 नवंबर को मुस्तक़िल को सुनहरा गांव मेवात से हिरासत में लिया और जांच एजेंसी के हवाले कर दिया, ये उमर के सम्पर्क में था और चाइना से MBBS किया था और अल्फ़ला यूनिवर्सिटी में इंटर्नशिप कर रहा था।
आरोपी आतंकियों को लेकर बड़ा खुलासा
दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच कर रहे जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपी आतंकी डॉ. उमर, डॉ. मुज़म्मिल, डॉ. शाहीन और उनके सहयोगियों ने रडार से दूर रहने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया। वे संवेदनशील बातचीत के लिए सिग्नल और थ्रीमा जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का भी इस्तेमाल करते थे।
बातचीत के लिए करते थे डेडड्रॉप ईमेल का इस्तेमाल
सूत्रों के मुताबिक, अल-फ़लाह के डॉक्टरों ने अपनी बातचीत के निशान छिपाने के लिए डेडड्रॉप ईमेल का इस्तेमाल किया। आरोपी ने एक ऐसी संचार प्रणाली का इस्तेमाल किया जिसका पता लगाना लगभग नामुमकिन था।
# मॉड्यूल के सदस्य एक ही साझा ईमेल खाते के ज़रिए काम करते थे।
# उन्होंने कभी कोई ईमेल भेजा या प्राप्त नहीं किया – इसके बजाय, वे “ड्राफ्ट” फ़ोल्डर में संदेश टाइप करते थे, और बाद में अन्य लोग उन्हें पढ़ने के लिए लॉग इन करते थे।
# इस तरीके से लगभग कोई डिजिटल फ़ुटप्रिंट नहीं बचता, जिससे एजेंसियों के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है
यूनिवर्सिटी में पाई गईं कई खामियां
पहली एफआईआर धारा 12 के उल्लंघन के लिए दर्ज की गई है, जबकि दूसरी एफआईआर विश्वविद्यालय द्वारा कथित रूप से झूठे मान्यता दावों से संबंधित है। अधिकारियों का कहना है कि यूजीसी और एनएएसी द्वारा अपनी समीक्षा के दौरान गंभीर अनियमितताओं को उजागर करने के बाद ये मामले दर्ज किए गए। दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने एक बड़ी साजिश की जांच के लिए एफआईआर दर्ज की थी।
किन मामलों में एफआईआर हुई है दर्ज, जानें
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) द्वारा शुरू की गई कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने अल-फलाह विश्वविद्यालय के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं।
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