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इटावा में वन विभाग की भूमि पर बनी सैकड़ों साल पुरानी सैय्यद बाबा दरगाह के ध्वस्तीकरण को लेकर विवाद गहरा गया,16 फरवरी को होने वाली सुनवाई से दरगाह का भविष्य तय होगा.

यूपी में इटावा के बीहड़ इलाके में स्थित सैकड़ों साल पुरानी बीहड़ वाले सैय्यद बाबा दरगाह को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. वन विभाग द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ दरगाह के केयरटेकर फजले इलाही सामाजिक वानिकी न्यायालय के समक्ष पेश हुए है. पक्षकार की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 फरवरी तय कर दी है. इस सुनवाई को दरगाह के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

इटावा के बीहड़ क्षेत्र में मौजूद सैय्यद बाबा दरगाह को वन विभाग ने अपनी भूमि पर बना अवैध निर्माण बताया है. विभाग का कहना है कि यह दरगाह उनके किसी भी रिकॉर्ड या नक्शे में दर्ज नहीं है. वहीं, दूसरी ओर केयरटेकर फजले इलाही का दावा है कि यह दरगाह सैकड़ों वर्षों से मौजूद है और यहां दूरदराज से लोग जियारत के लिए आते रहे हैं. उनके अनुसार यह केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि लोगों की आस्था का केंद्र है.

न्यायालय में मजबूती से रखा पक्ष

सामाजिक वानिकी न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान फजले इलाही और उनके अधिवक्ता नदीम अहमद खान ने प्रार्थना पत्र देकर वन विभाग से कई जरूरी जानकारियां मांगीं. उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से इस दरगाह पर धार्मिक परंपराएं निभाई जा रही हैं और इन्हें बिना ठोस आधार के खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यहां न्याय नहीं मिला तो वे सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने से पीछे नहीं हटेंगे.

शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल आईजीआरएस पर दर्ज एक शिकायत से हुई थी. शिकायत में बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैय्यद बाबा की मजार को लेकर आपत्ति जताई गई थी। शिकायत के बाद वन विभाग हरकत में आया और जांच शुरू की. शुरुआती जांच में मजार को वन विभाग की भूमि पर स्थित बताया गया, जिसके बाद इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.

ध्वस्तीकरण नोटिस से बढ़ी चिंता

जांच के बाद वन विभाग की ओर से दरगाह के केयरटेकर फजले इलाही से जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए. दस्तावेज प्रस्तुत न होने पर विभाग ने ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दरगाह परिसर में चस्पा कर दिया. इस नोटिस के खिलाफ फजले इलाही ने वन विभाग को जवाब भी दिया, लेकिन मामला न्यायालय तक पहुंच गया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं.

वन विभाग ने रखा अपना पक्ष

बढ़पुरा क्षेत्र के वन रेंजर अशोक शर्मा ने बताया कि जांच में यह साफ तौर पर सामने आया है कि सैय्यद बाबा दरगाह वन विभाग के किसी भी नक्शे में दर्ज नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि यहां किसी भी धार्मिक गतिविधि या कार्यक्रम के लिए विभाग से कभी अनुमति नहीं ली गई. इसी आधार पर विभाग ने नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है.

16 फरवरी पर टिकी सबकी नजर

वन विभाग न्यायालय में 5 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान फजले इलाही और उनके अधिवक्ता ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. अब अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी. इस तारीख को यह तय होने की उम्मीद है कि बीहड़ वाले सैय्यद बाबा दरगाह का भविष्य क्या होगा. फिलहाल पूरे इलाके की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं.

About Manish Shukla

Manish Shukla
मैं मनीष शुक्ला RBNEWS PVT LTD नेटवर्क में मुख्य संपादक एवं डायरेक्टर हूं. मीडिया उद्योग में 4 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर पाठको को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली खबरों को सत्यतापूर्वक पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं यु.पी., एम.पी., बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल एवं दिल्ली सरकार की राजनीतिक व अपराधिक घटनाओं, एवं प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ कुछ इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं.

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