कानपुर के जाजमऊ के प्योंदी गांव में एक मजदूर परिवार अपने कच्चा मकान में रहते थे. इसी दौरान मजदूरी करते-करते उनकी पहचान दीपक नाम के युवक से हुई. दीपक ने खुद को अकेला बताते हुए उनसे एक वक्त का खाना और रहने के लिए ठिकाना मांगा था. परिवार को दीपक पर दया आ गई और उन्होंने दीपक को रहने के लिए अपना घर खाने के लिए खाना दिया, लेकिन किसी को भी नहीं पता था कि जिस दीपक को उन्होंने घर में जगह दी है. वही उनकी बेटी की हत्या का कारण बनेगा.
दीपक 2022 में प्योंदि गांव के एक मजदूर परिवार के साथ रहने लगा. इसके कुछ दिन के बाद ही दीपक मजदूर परिवार की नाबालिग बेटी को बहला फुसला कर ले गया और कुछ ही महीनों के बाद 2023 में उसकी हत्या कर दी. हत्या का पता चलते ही परिवार ने आरोपी दीपक के खिलाफ थाना में मुकदमा दर्ज करा दिया और पुलिस ने उस पर 25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया था, लेकिन दीपक किसी की पकड़ में नहीं आ रहा था.
दो साल से फरार था दीपक
दीपक पिछले दो सालों से पुलिस से बचते हुए घूम रहा था, लेकिन शनिवार सुबह पुलिस ने दीपक को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है.एनकाउंटर की जानकारी होने पर पीड़ित परिवार ने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा है कि ऐसे अपराधियों को पैर में गोली न मारकर सीधा जान से मार देना चाहिए. मां मालती देवी अपनी बेटी के हत्यारे के एनकाउंटर की जानकारी पर बिलख बिलख रोने लगी और कहा कि उन्हें न्याय मिल गया. पुलिस आरोपी को कठोर से कठोर सजा दिलाए.
पुलिस ने पैर में मारी गोली
कानपुर की कमिश्नरेट ने जब आरोपी दीपक को पकड़ने की कोशिश की तो उसने पुलिस के जवानों पर ही फायरिंग शुरू कर दी. जिससे बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आरोपी के पैर में गोली मार दी और फिर गिरफ्तार कर लिया. गोली लगने के बाद पुलिस ने आरोपी को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया है. इस एनकाउंटर के बाद डीसीपी श्रवण कुमार ने पुलिस बल को बधाई देते हुए नगद इनाम भी दिया है.
डीसीपी ने बताया कि दीपक कई आपराधिक मामले दर्ज थे. पुलिस और आरोपी की मुठभेड़ जिदपुर के पास स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास हुई थी.
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