उत्तर प्रदेश सरकार ने राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित AI सिटी (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी) के लिए विस्तृत खाका तैयार कर लिया है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश को तकनीकी और डिजिटल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
प्रस्तावित योजना के तहत AI सिटी के कुल क्षेत्रफल का 60 प्रतिशत हिस्सा कोर जोन के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में सहायक और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. AI सिटी के कोर जोन में मुख्य रूप से तकनीकी और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां संचालित होंगी.
इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग रिसर्च सेंटर, आईटी और टेक स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन हब, डाटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी और निजी संस्थानों के लिए AI बेस्ड लैब, स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग सेंटर होगा. इस कोर जोन का उद्देश्य युवाओं को उच्च तकनीकी शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है.
40 प्रतिशत क्षेत्र में मिलेंगी ये सुविधाएं
AI सिटी के शेष 40 प्रतिशत क्षेत्र में नागरिक और सहायक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, ताकि यह एक स्मार्ट और आत्मनिर्भर टाउनशिप के रूप में उभर सके.
इनमें:-
आवासीय परिसर
शैक्षणिक संस्थान
स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक अस्पताल
शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और कमर्शियल स्पेस
हरित क्षेत्र, पार्क और मनोरंजन सुविधाएं
स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और डिजिटल कनेक्टिविटी
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, AI सिटी के विकसित होने से हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है. साथ ही देश-विदेश की आईटी और टेक कंपनियों के निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा. यह परियोजना उत्तर प्रदेश को तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक होगी.
जल्द शुरू हो सकता है काम
AI सिटी को लेकर भूमि चयन और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि तय समयसीमा के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू किया जाए, ताकि लखनऊ को देश के प्रमुख AI और टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित किया जा सके. कुल मिलाकर, AI सिटी का यह खाका न सिर्फ राजधानी लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश के आर्थिक और तकनीकी विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
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