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अमेरिका ने एक सैन्य अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया को अपनी हनक का संदेश दिया, अमेरिका अब चलाएगा दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार? जानें

अमेरिका ने एक सैन्य अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया को अपनी हनक का संदेश दिया है। मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद एक संबोधन में साफ तौर पर कहा कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा। यानी एक तरह से वेनेजुएला के प्रचुर तेल संसाधन पर अमेरिका का हक होगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के जर्जर तेल बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए अरबों डॉलर का निवेश करने को तैयार हैं और इससे देश के लिए पैसा कमाया जाएगा। इस लेख में हम वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर दशकों पुराने संघर्ष के बारे में जानेंगे।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। यह मात्रा करीब 303 अरब बैरल है जो दुनिया के तेल भंडार का करीब 20 प्रतिशत है और सऊदी अरब से भी अधिक है। अगर अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करते है तो फिर वैश्विक राजनीति में यह एक अहम मोड़ साबित होगा। क्योंकि केवल अपने स्वार्थ के लिए एक संप्रभु देश पर इस तरह का नियंत्रण दुनिया के हित में सही नहीं होगा। कालांतर में अमेरिका को इसके दुष्परिणाम के लिए भी तैयार रहना होगा। हालांकि वेनेजुएला की विशाल तेल संपदा और पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज तथा मादुरो के कार्यकाल में अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों के इतिहास को देखते हुए अमेरिका का यह कदम अप्रत्याशित नहीं था

अमेरिकी निवेश का लंबा इतिहास

दरअसल, वेनेजुएला को 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में इसे अपने तेल भंडार के कारण दक्षिण अमेरिका का सबसे समृद्ध देश माना जाता था। दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित इस देश की आबादी करीब 3 करोड़ है। अमेरिका सहित विदेशी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल उद्योग में भारी निवेश किया और उसकी राजनीति में भी गहरी भूमिका निभाई। हालांकि अमेरिकी विरोध के बावजूद, वेनेजुएला के नेताओं ने अपने प्रमुख निर्यात संसाधन पर नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया।

1976 में तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण

वेनेजुएला 1960 में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश था और 1976 में उसने अपने तेल इंडस्ट्री का बड़े पैमाने पर राष्ट्रीयकरण किया। वेनेजुएला के इस कदम से एक्सॉनमोबिल जैसी अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ। वेनेजुएला के इस कदम से ट्रंप प्रशासन के हालिया दावों को बल मिला कि वेनेजुएला ने “अमेरिकी तेल चुरा लिया”। हालांकि, आम वेनेजुएलावासियों के लिए आर्थिक समृद्धि नहीं आई।

1989 में काराकास में व्पापक प्रदर्शन

तेल उद्योग के मिस मैनेजमेंट की वजह से वेनेजुएला कर्ज संकट में फंसा और 1988 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दखल दिया। फरवरी 1989 में कराकस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिन्हें कुचलने के लिए सरकार ने सेना तैनात की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस प्रदर्शन के दौरान करीब 300 लोग मारे गए। हालांकि मृतकों की वास्तविक संख्या की बात करें तो यह इससे कई गुना अधिक हो सकती है। इसके बाद वेनेजुएला का समाज अमीर तबके, जो अमेरिका के साथ सहयोग चाहता था, और मजदूर वर्ग, जो अमेरिका से स्वतंत्रता चाहता था, के बीच और अधिक बंट गया। यह विभाजन तब से वेनेजुएला की राजनीति को परिभाषित करता रहा है।

शावेज का उदय

इसके बाद वेनेजुएला की राजनीति में ह्यूगो शावेज का उदय हुआ। शावेज ने अपने करियर की शुरुआत एक सैन्य अधिकारी के रूप में की। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने सेना के भीतर समाजवादी ‘रेवोल्यूशनरी बोलिवेरियन मूवमेंट-200’ की स्थापना की और सरकार के खिलाफ खड़े हो गए। 1989 के दंगों के बाद शावेज ने सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बनानी शुरू की। फरवरी 1992 में उन्होंने राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज़ के खिलाफ असफल तख्तापलट किया। परेज को अमेरिका समर्थक राष्ट्रपति माना जाता था। शावेज ने बाद में एक और प्रयास किया लेकिन विफल रहा। इसके बाद शावेज दो साल जेल में रहे, लेकिन 1998 में समाजवादी क्रांतिकारी एजेंडे के साथ राष्ट्रपति पद के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे।

शावेज वेनेजुएला और लैटिन अमेरिका की राजनीति में एक प्रभावशाली शख्सियत बन गए। उनकी क्रांति ने स्पेनिश औपनिवेशिक शासन से दक्षिण अमेरिका को मुक्त कराने वाले सिमोन बोलिवार की विरासत को पुनर्जीवित किया। तेल राजस्व से खाद्य, स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रमों को सब्सिडी देने के कारण वे देश में लोकप्रिय रहे और क्षेत्र के समान विचारधारा वाले शासन में भी उन्हें सम्मान मिला। उन्होंने क्यूबा को अरबों डॉलर का तेल दिया, जिसके बदले हजारों क्यूबाई डॉक्टर वेनेजुएला के स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने लगे।

शावेज ने दुनिया के विभिन्न मंचों पर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का खुलकर विरोध किया। वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में शावेज तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को “शैतान” तक कहा।

अमेरिका पर तख्तापलट को बढ़ावा देने का आरोप 

अप्रैल 2002 में विपक्षी प्रदर्शनों के बाद शावेज को कुछ समय के लिए सत्ता से हटा दिया गया और कारोबारी पेड्रो कारमोना को राष्ट्रपति घोषित किया गया। इसके तुरंत बाद अमेरिका में तत्कालीन बुश प्रशासन ने कारमोना को मान्यता दे दी। हालांकि, दो दिन बाद ही शावेज, समर्थकों के भारी जनसमर्थन के साथ सत्ता में लौट आए। अमेरिका ने तख्तापलट में भूमिका से इनकार किया, लेकिन वर्षों तक यह सवाल बना रहा कि क्या उसे पहले से जानकारी थी? 2004 में सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि सीआईए को साजिश की जानकारी थी, लेकिन भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी।

मादुरो पर अमेरिकी दबाव जारी

निकोलस मादुरो वर्ष 2000 में नेशनल असेंबली के लिए चुने गए और शावेज के करीबी बन गए। 2012 में मादुरो वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति बने और 2013 में शावेज के निधन के बाद बेहद कम अंतर से राष्ट्रपति चुनाव जीता। हालांकि मादुरो को शावेज जैसा जनसमर्थन नहीं मिला। आर्थिक हालात बिगड़ते गए और महंगाई बेकाबू हो गई। ओबामा और ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए और 2018 तथा 2024 के चुनावों में मादुरो की जीत को मान्यता नहीं दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के बाद वेनेजुएला चीन पर निर्भर हो गया। वेनेजुएला ने चीन को तेल बेचना शुरू कर दिया। बाद के दिनों में मादुरो ने कई तख्तापलट और हत्या की साजिशों को नाकाम करने का दावा किया, हालांकि अमेरिका ने किसी भी भूमिका से इनकार किया। अब ट्रंप ने मादुरो को खुले तौर पर हटाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका के वहां वित्तीय हित बने रहेंगे, वेनेजुएला की राजनीति में अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहेगा।

अमेरिका कैसे चलाएगा वेनेजुएला की रिफाइनरी?

  1. अमेरिकी कंपनियों एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों को फिर से वेनेजुएला भेजा जाएगा, जिनकी संपत्तियों का शावेज की सरकार ने राष्ट्रीयकरण कर लिया था।
  2. अमेरिका का इरादा वहां के जर्जर तेल बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करना है, ताकि उत्पादन को फिर से बढ़ाया जा सके।
  3. आधिकारिक तौर पर वेनेजुएला एक स्वतंत्र देश रहेगा, लेकिन तेल का उत्पादन, बिक्री और कीमतें अब काफी हद तक अमेरिकी रणनीतियों और कंपनियों द्वारा तय की जाएंगी।
  4. अब तक वेनेजुएला अपना ज्यादातर तेल चीन को बेच रहा था। अमेरिका के आने से चीन और रूस जैसे देशों का वहां से प्रभाव खत्म होने की कगार पर है।

About Manish Shukla

Manish Shukla
मैं मनीष शुक्ला RBNEWS PVT LTD नेटवर्क में मुख्य संपादक एवं डायरेक्टर हूं. मीडिया उद्योग में 4 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर पाठको को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली खबरों को सत्यतापूर्वक पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं यु.पी., एम.पी., बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल एवं दिल्ली सरकार की राजनीतिक व अपराधिक घटनाओं, एवं प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ कुछ इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं.

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